एक संतुलित दिन केवल बिना रुके काम करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह जानने के बारे में है कि आप काम के बीच में अपना और अपनी ऊर्जा का ख्याल कैसे रखते हैं।
हमारा शरीर एक प्राकृतिक घड़ी की तरह काम करता है। जब हम समय पर घर का बना खाना (home-cooked meals) खाते हैं, तो यह लय सही बनी रहती है। लेकिन व्यस्त शहरी जीवन में अक्सर हम बुनियादी चीजों को पीछे छोड़ देते हैं।
समय पर भोजन करने से शरीर की पाचन लय (digestive rhythm) बनी रहती है और अचानक भूख लगने या शाम को कमजोरी महसूस होने की संभावना कम होती है।
भारत के गर्म मौसम में पानी की कमी आसानी से हो सकती है, जो सीधे तौर पर थकान, सुस्ती और सिरदर्द के रूप में सामने आती है। ऑफिस डेस्क पर पानी की बोतल रखना एक आसान उपाय है।
अच्छी नींद और दिन के दौरान थोड़ा चलना-फिरना (जैसे लंच के बाद छोटी वॉक) शरीर को तरोताजा रखता है और लगातार बैठने के नुकसान को कम करता है।
कंप्यूटर के सामने लंबे समय तक बैठना (long sitting) आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बन गया है। काम के बीच में ब्रेक के नाम पर बार-बार ली जाने वाली चाय (chai) और तली-भुनी चीज़ें एक आम बात है, जो हमारी ऊर्जा को अस्थिर करती हैं।
सुबह की जल्दबाजी से लेकर शाम की थकान (evening fatigue) तक, हमारा शरीर कई बदलावों से गुजरता है। शाम को घर लौटते समय ऊर्जा का पूरी तरह से खत्म हो जाना इस बात का संकेत है कि दिन भर के रूटीन में संतुलन की कमी थी। बिना किसी जादुई उपाय के, सिर्फ अपने पैटर्न को देखकर छोटे बदलाव किए जा सकते हैं।